नए साल में किसानों के लिए तीन खुशखबर, गन्ना, पराली और बिजली में राहत



 गन्ना किसानों के लिए 3500 करोड़ रुपए मंजूर, बकाया का होगा भुगतान

प्रधानमंत्री नरेन्द्र मोदी की अध्यक्षता में आर्थिक मामलों की मंत्रिमंडलीय समिति की बैठक हुई। इसमें गन्ना किसानों को 3,500 करोड़ रुपए की सहायता देने को मंजूरी दी गई। बता दें कि इस समय देश में करीब पांच करोड़ गन्ना किसान और उनके परिवार हैं। इनके अलावा, चीनी मिलों में तथा उसकी सहायक गतिविधियों में काम करने वाले करीब पांच लाख कामगार हैं और इन सभी की आजीविका चीनी उद्योग पर निर्भर है। किसान अपना गन्ना चीनी मिलों को बेचते हैं, लेकिन चीनी मिल मालिकों से उन्हें उनका भुगतान प्राप्त नहीं होता क्योंकि उनके पास चीनी का अतिरिक्त स्टॉक होता है। इस चिंता को दूर करने के लिए सरकार चीनी के अतिरिक्त स्टॉक को शून्य पर लाने के प्रयास कर रही है। इससे गन्ना किसानों के बकाए का भुगतान करने में सहूलियत होगी। सरकार इस उद्देश्य के लिए 3500 करोड़ रुपये व्यय करेगी और इस सहायता की राशि को चीनी मिलों की ओर से बकाये के भुगतान के तौर पर सीधे किसानों के खातों में जमा किया जाएगा। शेष राशि, यदि बचेगी तो, उसे चीनी मिलों के खाते में जमा कर दिया जाएगा

पांच करोड़ गन्ना किसानों को होगा फायदा

केंद्र सरकार के इस निर्णय से पांच करोड़ गन्ना किसानों और उनके परिवारों तथा चीनी मिलों एवं अन्य सहायक गतिविधियों में काम करने वाले पांच लाख कामगारों को लाभ होगा। इस सब्सिडी का उद्देश्य चीनी मिलों द्वारा चीनी सत्र 2020-21 के दौरान अधिकतम स्वीकार्य निर्यात कोटा (एमएईक्यू) के तहत 60 लाख मीट्रिक टन की मात्रा तक चीनी का निर्यात करने पर उसके प्रबंधन, सुधार तथा अन्य प्रसंस्करण लागत और अंतर्राष्ट्रीय तथा घरेलू परिवहन एवं माल भाड़ा शुल्क समेत उस पर आने वाली कुल बाजार कीमत को पूरा करना है।


 





किसान आंदोलन: किसानों की दो मांगों पर सरकार ने जताई सहमति

कृषि कानूनों को लेकर चल रहे किसान आंदोलन के बीच सरकार और किसान यूनियनों के बीतचीत में दो राहत भरी खबर सामने आई हैं। किसानों की ओर से केंद्र सरकार को दिए गए कई प्रस्ताव में से दो प्रस्तावों पर मोदी सरकार ने अपनी सहमति जताई है। किसानों और सरकार के बीच छठे दौर की बातचीत में बिजली बिल के मसले को सुलझा लिया गया है और अब पराली जलाना भी जुर्म नहीं होगा। करीब 5 घंटे चली बैठक के बाद कृषि मंत्री नरेंद्र तोमर ने कहा कि पर्यावरण अध्यादेश पर सहमति बन गई है और ऐसे में अब पराली जलाना जुर्म नहीं होगा और बिजली बिल का मसला भी सुलझ गया है।


समाचार एजेंसी भाषा के मुताबिक, सरकार ने बुधवार को एमएसपी खरीद प्रणाली के बेहतर क्रियान्वयन पर एक समिति गठित करने की पेशकश की और विद्युत शुल्क (बिजली बिल) पर प्रस्तावित कानूनों और पराली जलाने से संबंधित प्रावधानों को स्थगित रखने पर सहमति जताई, मगर किसान संगठनों के नेता पांच घंटे से अधिक समय तक चली छठे दौर की वार्ता में तीनों नए कृषि कानूनों को निरस्त किए जाने की अपनी मुख्य मांग पर अड़े रहे। अब चार जनवरी को फिर से वार्ता होगी। बता दें कि करीब एक महीने से ऊपर हो गया है किसान केंद्र सरकार द्वारा लागू किए गए कृषि कानूनों का विरोध कर रहे हैं। छठे दौर की वार्ता नौ दिसंबर को ही होने वाली थी, लेकिन केंद्रीय गृह मंत्री अमित शाह और किसान यूनियनों के कुछ नेताओं के बीच इससे पहले हुई अनौपचारिक बातचीत में कोई नतीजा नहीं निकलने पर बैठक रद्द कर दी गई थी। सरकार ने तीनों कृषि कानूनों को निरस्त किए जाने से इनकार कर दिया था।


 


यह भी पढ़ें : कृषि यंत्रों पर सब्सिडी : अब इन नए कृषि यंत्रों पर मिलेगी सब्सिडी


अब केरल से भी उठी नए तीन कृषि कानूनों को निरस्त करने की मांग, प्रस्ताव पारित

केरल विधानसभा ने प्रस्ताव पारित कर केंद्र के तीनों नए कृषि कानूनों को वापस लेने की मांग की गई है। केरल के मुख्यमंत्री पिनराई विजयन ने प्रस्ताव पेश करते हुए नए कानूनों को तत्काल वापस लिए जाने की मांग की और कहा कि देश किसानों द्वारा किए इतिहास के अब तक के सबसे प्रभावशाली प्रदर्शनों में से एक को देख रहा है। उन्होंने कहा कि केंद्र के कृषि कानून किसान-विरोधी और कॉरपोरेट को फायदा पहुंचाने वाले हैं। विजयन ने कहा कि प्रदर्शन के अंतिम 35 दिन में कम से कम 32 किसानों की जान गई है। 


उन्होंने कहा कि जब लोगों को उनके जीवन को प्रभावित करने वाले किसी मुद्दे को लेकर चिंता हो, तब विधानसभाओं की यह जिम्मेदारी बनती है कि वे इस पर गंभीरता से विचार करे। उन्होंने कहा कि केंद्र ऐसे समय पर यह विवादास्पद कानून लेकर आई है, जब कृषि क्षेत्र पहले से ही चुनौतियों का सामना कर रहा है और इसलिए किसानों को चिंता है कि वे मौजूदा समर्थन मूल्य का फायदा भी खो देंगे।


 




 


अगर आप अपनी कृषि भूमि, अन्य संपत्ति, पुराने ट्रैक्टर, कृषि उपकरण, दुधारू मवेशी व पशुधन बेचने के इच्छुक हैं और चाहते हैं कि ज्यादा से ज्यादा खरीददार आपसे संपर्क करें और आपको अपनी वस्तु का अधिकतम मूल्य मिले तो अपनी बिकाऊ वस्तु की पोस्ट ट्रैक्टर जंक्शन पर नि:शुल्क करें और ट्रैक्टर जंक्शन के खास ऑफर का जमकर फायदा उठाएं।

टिप्पणियाँ

इस ब्लॉग से लोकप्रिय पोस्ट

आरक्षण सूची में गड़बड़ी : पंचायत में अनुसूचित जनजाति परिवार ही नहीं, फिर भी ग्राम प्रधान की 53 सीटें एसटी कोटे में रिजर्व